UPSC Prelims 2027 की तैयारी को दें एक स्पष्ट दिशा — दैनिक अध्ययन, UPSC-आधारित प्रश्न अभ्यास और व्यक्तिगत मेंटरशिप के साथ।
The Study IAS का द्रोणाचार्य 3.0 हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों के लिए एक संरचित Prelims Mentorship Program है। इसमें दैनिक अकादमिक सत्र, निर्धारित अध्ययन लक्ष्य, प्रतिदिन 10 अभ्यास प्रश्न, नियमित टेस्ट और डिस्कशन, विशेष PYQ-आधारित टेस्ट, GS-CSAT तथा व्यक्तिगत मार्गदर्शन को एक साथ जोड़ा गया है।
UPSC प्रीलिम्स की तैयारी में चुनौती केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि सही समय पर रिवीजन करना, प्रश्नों को समझना और कमजोरियों को दूर करना है। द्रोणाचार्य में दैनिक तैयारी, प्रतिदिन 10 अभ्यास प्रश्न, टेस्ट डिस्कशन और व्यक्तिगत मेंटरशिप को इसी सुधार प्रक्रिया से जोड़ा गया है।
एक ऐसी अकादमिक व्यवस्था जो अध्ययन, नियमित अभ्यास और प्रदर्शन सुधार को साथ लेकर चलती है।
निर्धारित अध्ययन लक्ष्य, नियमित अकादमिक सत्र, दैनिक टेस्ट और डिस्कशन के साथ हर दिन 10 अभ्यास प्रश्न — ताकि तैयारी निरंतर और व्यवस्थित बनी रहे।
1995–2026 के UPSC प्रश्नों पर आधारित ACE Topic Mapping, विशेष PYQ-Themed Tests और प्रश्नों की प्रवृत्ति पर केंद्रित अकादमिक चर्चा।
कमजोर विषयों, टेस्ट में होने वाली गलतियों और अध्ययन की चुनौतियों को पहचानकर आवश्यक अकादमिक मार्गदर्शन।
मणिकांत सर की GS Manthan कक्षाएँ, स्टैटिक-करंट अफेयर्स इंटरलिंकिंग, CSAT अभ्यास और लाइव MCQ सॉल्विंग सेशन।
हिंदी माध्यम बैच 7 दिसंबर 2026 से शुरू। ऑनलाइन और क्लासरूम-ऑफलाइन दोनों विकल्प उपलब्ध हैं।
*उल्लिखित फीस प्रचारात्मक ऑफर पर आधारित हैं। नामांकन से पहले वर्तमान शुल्क, प्रवेश क्षमता एवं बैच संबंधी विवरण की पुष्टि करें।
द्रोणाचार्य 3.0 का पाठ्यक्रम हिंदी माध्यम के UPSC अभ्यर्थियों के लिए दैनिक अकादमिक तैयारी, PYQ विश्लेषण, GS, समसामयिकी, CSAT, टेस्ट डिस्कशन और व्यक्तिगत मेंटरशिप को जोड़ता है। उद्देश्य केवल विषयों को पढ़ना नहीं, बल्कि परीक्षा के अनुरूप ज्ञान का प्रयोग करना और अपनी कमजोरियों को व्यवस्थित रूप से सुधारना है।
प्रतिदिन की तैयारी को व्यवस्थित रखने के लिए निश्चित अकादमिक गतिविधियों का एक चक्र तैयार किया गया है।
UPSC के पिछले वर्षों के प्रश्नों के आधार पर महत्वपूर्ण विषयों, अवधारणाओं और पूछे जाने वाले प्रश्नों की प्रकृति को समझना।
कार्यक्रम में कुल 10 विशेष टॉपिक-वाइज PYQ-ओरिएंटेड टेस्ट शामिल हैं। प्रत्येक के साथ डिस्कशन रखा गया है ताकि अभ्यर्थी प्रश्नों की प्रकृति और संबंधित विषयों को बेहतर समझ सकें।
2023 और 2026 की UPSC प्रारंभिक परीक्षाओं में दिखाई देने वाली प्रश्न प्रवृत्तियों को ध्यान में रखते हुए परीक्षा-उन्मुख अभ्यास।
Current Affairs को अलग-अलग तथ्यों के संग्रह के रूप में नहीं, बल्कि स्थैतिक सामान्य अध्ययन से जुड़े विषयों के रूप में समझने पर जोर।
UPSC Prelims के qualifying CSAT पेपर के लिए परीक्षा-केंद्रित अभ्यास और प्रश्न-समाधान की प्रक्रिया को समझना।
UPSC Prelims की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए चयनित विषयों और क्षेत्रों पर विशेष अकादमिक ध्यान।
प्रत्येक अभ्यर्थी के अध्ययन और टेस्ट प्रदर्शन से जुड़ी समस्याओं को समझते हुए आवश्यक मार्गदर्शन देने पर जोर।
द्रोणाचार्य का उद्देश्य एक ऐसा तैयारी चक्र बनाए रखना है जिसमें दैनिक अध्ययन, UPSC आधारित अभ्यास, टेस्ट डिस्कशन, समसामयिकी, CSAT और व्यक्तिगत मेंटरशिप मिलकर प्रारंभिक परीक्षा 2027 की तैयारी को अधिक व्यवस्थित और उद्देश्यपूर्ण बनाएं।
UPSC Prelims 2027 की तैयारी में केवल अध्ययन सामग्री की उपलब्धता पर्याप्त नहीं है। यह भी महत्वपूर्ण है कि अभ्यर्थी क्या पढ़ रहा है, किन प्रश्नों में गलती कर रहा है, किन अवधारणाओं पर दोबारा काम करना है और अगले टेस्ट से पहले किस प्रकार रिवीजन करना है।
द्रोणाचार्य 3.0 की शिक्षण पद्धति दैनिक अनुशासन, PYQ-आधारित समझ, नियमित अभ्यास और व्यक्तिगत मार्गदर्शन पर आधारित है।
दैनिक अध्ययन लक्ष्य, विषयगत प्राथमिकताएँ और निर्धारित अकादमिक सत्र।
नियमित टेस्ट, PYQ-उन्मुख प्रश्न और UPSC पैटर्न पर आधारित अभ्यास।
टेस्ट डिस्कशन, कमजोरियों की पहचान और मेंटर से अकादमिक सहायता।
गलतियों के कारणों पर काम करें और अगली अभ्यास प्रक्रिया में सुधार लागू करें।
UPSC के विगत वर्षों के प्रश्नों से परीक्षा-संबंधी विषयों, अवधारणाओं और प्रश्नों की प्रकृति की पहचान करके तैयारी को प्रासंगिक दिशा देना।
निर्धारित लक्ष्य, अकादमिक सेशन, टेस्ट तथा डिस्कशन के माध्यम से पढ़ाई को नियमित अभ्यास से जोड़ना।
कथन-आधारित प्रश्नों, अपरिचित तथ्यों, वैचारिक प्रश्नों और एलिमिनेशन की प्रक्रिया को परीक्षा के संदर्भ में समझना।
अभ्यर्थियों की कठिनाइयों को पहचानकर उन्हें संबंधित विषयों, अध्ययन पद्धति और अभ्यास संबंधी मार्गदर्शन देना।
GS Manthan और समसामयिक विषयों के माध्यम से वर्तमान घटनाओं को इतिहास, राजनीति, अर्थव्यवस्था, भूगोल तथा अन्य GS विषयों की अवधारणाओं से जोड़ना।
GS के साथ CSAT और लाइव MCQ अभ्यास को शामिल करना ताकि अभ्यर्थी प्रारंभिक परीक्षा के दोनों प्रश्नपत्रों पर ध्यान दे सकें।
प्रारंभिक परीक्षा की तैयारी में महत्वपूर्ण प्रश्न केवल यह नहीं है कि आपने कितना पढ़ा, बल्कि यह भी है कि आपने कितना समझा, कितने प्रश्नों को सही तर्क के साथ हल किया और अपनी गलतियों से क्या सीखा। द्रोणाचार्य इसी प्रक्रिया को दैनिक अध्ययन और व्यक्तिगत मेंटरशिप से जोड़ता है।